अगला मास
आज 15 जून 2026 को अधिक ज्येष्ठ मास समाप्त हो रहा है। इसके बाद जो मास आता है, वह निज ज्येष्ठ मास या शुद्ध ज्येष्ठ मास है। इसका अर्थ है कि पहले जो ज्येष्ठ “अधिक” रूप में था, अब वही मास अपने नियमित/निज रूप में चल रहा है।
मुख्य पंचांग क्रम:
| अवधि | मास / पक्ष | मुख्य बात |
|---|---|---|
| 15 जून 2026 सुबह के बाद | ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष आरम्भ | अधिक मास समाप्त, शुद्ध ज्येष्ठ आरम्भ |
| 16 जून 2026 | ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया | चन्द्र दर्शन, शुक्ल पक्ष आगे बढ़ता है |
| 25 जून 2026 | ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी | निर्जला एकादशी |
| 29 जून 2026 | ज्येष्ठ पूर्णिमा | वट पूर्णिमा व्रत, कबीर जयंती, पूर्णिमा व्रत |
| 30 जून 2026 से | उत्तर भारत में आषाढ़ कृष्ण पक्ष | पूर्णिमान्त परंपरा में आषाढ़ आरम्भ |
निज ज्येष्ठ मास के प्रमुख व्रत और पर्व
ज्येष्ठ मास का यह शुक्ल पक्ष छोटा है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। इस अवधि में प्रमुख व्रत और पर्व ये हैं:
| तारीख | तिथि / पक्ष | व्रत / पर्व |
|---|---|---|
| 16 जून 2026 | ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष | चन्द्र दर्शन |
| 18 जून 2026 | ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी | चतुर्थी व्रत |
| 19 जून 2026 | ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी/षष्ठी क्षेत्रीय गणना अनुसार | शीतल षष्ठी / स्कन्द षष्ठी परंपरा |
| 22 जून 2026 | ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी | धूमावती जयंती, मासिक दुर्गाष्टमी |
| 23 जून 2026 | ज्येष्ठ शुक्ल नवमी | महेश नवमी |
| 25 जून 2026 | ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी | निर्जला एकादशी / भीमसेनी एकादशी |
| 27 जून 2026 | ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी | शनि प्रदोष व्रत |
| 29 जून 2026 | ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा | वट पूर्णिमा व्रत, ज्येष्ठ पूर्णिमा, कबीरदास जयंती |
आषाढ़ मास में व्रत और पर्व
उत्तर भारतीय पूर्णिमान्त गणना के अनुसार 30 जून 2026 से आषाढ़ कृष्ण पक्ष शुरू होगा। इसके बाद जुलाई 2026 में ये प्रमुख व्रत और पर्व आएंगे:
| तारीख | पर्व / व्रत |
|---|---|
| 3 जुलाई 2026 | संकष्टी चतुर्थी |
| 10 जुलाई 2026 | योगिनी एकादशी |
| 12 जुलाई 2026 | मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत |
| 14 जुलाई 2026 | आषाढ़ अमावस्या |
| 15 जुलाई 2026 | आषाढ़ नवरात्रि आरम्भ, जगन्नाथ रथयात्रा |
| 16 जुलाई 2026 | कर्क संक्रांति |
| 25 जुलाई 2026 | देवशयनी एकादशी |
| 26 जुलाई 2026 | प्रदोष व्रत |
| 29 जुलाई 2026 | गुरु पूर्णिमा, व्यास पूजा, आषाढ़ पूर्णिमा |
प्रदोष व्रत:
| तारीख | वार | पक्ष / तिथि | व्रत | पूजा समय |
|---|---|---|---|---|
| 12 जुलाई 2026 | रविवार | आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी | रवि प्रदोष व्रत | शाम 07:22–09:24 |
| 26 जुलाई 2026 | रविवार | आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी | रवि प्रदोष व्रत | शाम 07:16–09:21 |
शुभ मुहूर्त — विवाह और गृह प्रवेश
जून 2026 में उपलब्ध प्रमुख विवाह मुहूर्त:
| तारीख | मुहूर्त | नक्षत्र / तिथि |
|---|---|---|
| 21 जून | 09:31 AM – 11:21 AM | उत्तरा फाल्गुनी, सप्तमी |
| 22 जून | 10:31 AM – 05:24 AM, 23 जून | हस्त, अष्टमी/नवमी |
| 23 जून | 05:24 AM – 10:13 AM | हस्त, नवमी |
| 24 जून | 01:59 PM – 05:25 AM, 25 जून | स्वाति, दशमी/एकादशी |
| 25 जून | 05:25 AM – 07:08 AM | स्वाति, एकादशी |
| 26 जून | 07:16 PM – 05:25 AM, 27 जून | अनुराधा, द्वादशी/त्रयोदशी |
| 27 जून | 05:25 AM – 10:11 PM | अनुराधा, त्रयोदशी |
| 29 जून | 04:16 PM – 04:03 AM, 30 जून | मूल, पूर्णिमा |
गृह प्रवेश मुहूर्त
गृह प्रवेश के लिए जून-जुलाई 2026 में प्रमुख उपलब्ध मुहूर्त:
| तारीख | मुहूर्त | नक्षत्र / तिथि |
|---|---|---|
| 24 जून | 05:25 AM – 01:59 PM | चित्रा, दशमी |
| 26 जून | 10:22 PM – 05:25 AM, 27 जून | अनुराधा, त्रयोदशी |
| 27 जून | 05:25 AM – 10:11 PM | अनुराधा, त्रयोदशी |
| 1 जुलाई | 06:51 AM – 05:27 AM, 2 जुलाई | उत्तराषाढ़ा, द्वितीया |
| 2 जुलाई | 05:27 AM – 09:27 AM | उत्तराषाढ़ा, द्वितीया |
इस मास से जुड़ी शास्त्रीय कथा
निर्जला एकादशी — भीम और वेदव्यास की कथा
निज ज्येष्ठ मास की सबसे महत्वपूर्ण शास्त्रीय कथा निर्जला एकादशी से जुड़ी है। पद्म पुराण, उत्तरखण्ड, अध्याय 51 में ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का वर्णन आता है। वहाँ युधिष्ठिर भगवान श्रीकृष्ण से ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी का महत्व पूछते हैं, और आगे वेदव्यास जी भीमसेन को एकादशी व्रत का मार्ग बताते हैं।
कथा का सार यह है कि भीमसेन भोजन-प्रिय थे और प्रत्येक एकादशी का उपवास कठिन मानते थे। तब वेदव्यास जी ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी पर निर्जल व्रत करने का निर्देश दिया। पद्म पुराण में कहा गया है कि इस दिन जल तक का त्याग कर श्रद्धा से व्रत करने पर वर्ष की एकादशियों के समान फल प्राप्त होता है। द्वादशी को स्नान, दान और भगवान विष्णु की पूजा के बाद पारण का विधान बताया गया है।
वट पूर्णिमा — सावित्री और सत्यवान की कथा
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर कई क्षेत्रों में वट पूर्णिमा व्रत रखा जाता है। इससे जुड़ी कथा सावित्री और सत्यवान की है, जिसका प्राचीन आधार महाभारत के वन पर्व में मिलता है। सावित्री-सत्यवान प्रसंग, यम से वरदान और सत्यवान के जीवन-प्रत्यावर्तन का उल्लेख मिलता है।
इस कथा का मूल संदेश केवल “सौभाग्य” नहीं, बल्कि निष्ठा, धर्म, बुद्धि, धैर्य और वचन की शक्ति है। सावित्री ने यमराज से धर्मसम्मत संवाद किया और सत्यवान के प्राण वापस पाए। इसलिए वट पूर्णिमा में वट-वृक्ष की पूजा, दीर्घ दाम्पत्य और परिवार की मंगलकामना से जुड़ती है।

