कांवड़ यात्रा का काल स्थानीय पंचांग-पद्धति, जल ग्रहण करने के स्थान, गन्तव्य शिवालय, श्रावणी मेले की अवधि और क्षेत्रीय धार्मिक परम्परा के अनुसार बदलता है।
उत्तर भारत की हरिद्वार-केन्द्रित कांवड़ यात्रा मुख्यतः श्रावण कृष्णपक्ष से श्रावण शिवरात्रि तक चलती है। इसके विपरीत सुल्तानगंज से देवघर की यात्रा पूरे श्रावण मास चलती है। पश्चिम बंगाल की तारकेश्वर जलयात्रा की अपनी पृथक् प्रशासनिक और धार्मिक अवधि है।
कांवड़ यात्रा 2026 की क्षेत्रवार तिथियाँ
| क्षेत्र और प्रमुख यात्रा | 2026 की अवधि | जल ग्रहण का प्रमुख स्थान | प्रमुख गन्तव्य अथवा जलाभिषेक |
|---|---|---|---|
| उत्तर भारत की मुख्य कांवड़ यात्रा | 30 जुलाई से 12 अगस्त 2026 | हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख और अन्य गंगा घाट | स्थानीय शिवालय, नीलकण्ठ महादेव, पुरा महादेव, दूधेश्वरनाथ तथा विभिन्न क्षेत्रीय शिव मन्दिर |
| मुख्य धार्मिक समापन | 11 अगस्त की रात्रि से 12 अगस्त का प्रातःकाल | यात्रा में लाया गया गंगाजल | श्रावण शिवरात्रि पर जलाभिषेक |
| सुल्तानगंज–देवघर श्रावणी कांवड़ यात्रा | 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 | सुल्तानगंज, बिहार | बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर |
| सुल्तानगंज–बासुकीनाथ यात्रा | 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 | सुल्तानगंज का गंगाजल | बैद्यनाथ धाम के पश्चात् बासुकीनाथ |
| तारकेश्वर श्रावणी जलयात्रा, पश्चिम बंगाल | 18 जुलाई से 28 अगस्त 2026 | बैद्यबाटी का निमाई तीर्थ घाट तथा आसपास के गंगा घाट | बाबा तारकनाथ मन्दिर, तारकेश्वर |
| काशी और पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्थानीय जलयात्राएँ | 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 के श्रावण मास में, विशेष रूप से सोमवार और शिवरात्रि पर | गंगा के स्थानीय घाट | काशी विश्वनाथ तथा क्षेत्रीय शिवालय |
| दक्षिण और पश्चिम भारत की श्रावण जलाभिषेक परम्पराएँ | स्थानीय अमान्त पंचांगानुसार मुख्यतः 13 अगस्त से 11 सितम्बर 2026 | स्थानीय नदियाँ, तीर्थकुण्ड और मन्दिर-जलस्रोत | त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर, मल्लिकार्जुन तथा अन्य शिवालय |
उत्तर भारत: 30 जुलाई से 12 अगस्त तक मुख्य कांवड़ अवधि
उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से सम्बद्ध मुख्य कांवड़ यात्रा 30 जुलाई को श्रावण मास के आरम्भ के साथ प्रारम्भ होती है। कांवड़िये हरिद्वार, गंगोत्री और गौमुख सहित गंगा के प्रमुख तीर्थों से जल ग्रहण करके अपने ग्राम, नगर अथवा निर्धारित शिवालय की ओर लौटते हैं।
इस यात्रा का प्रमुख धार्मिक उत्कर्ष श्रावण शिवरात्रि है। 11 अगस्त को श्रावण शिवरात्रि तथा मुख्य जलाभिषेक की है। चतुर्दशी तिथि और रात्रिकालीन शिवपूजा 11 अगस्त की रात्रि से 12 अगस्त के प्रातःकाल तक है। इसी आधार पर यात्रा की व्यावहारिक अवधि 30 जुलाई से 12 अगस्त 2026 तक है।
सुल्तानगंज से देवघर: पूरे श्रावण मास चलने वाली कांवड़ यात्रा
बिहार के सुल्तानगंज से झारखण्ड के देवघर तक चलने वाली यात्रा उत्तर भारत की शिवरात्रि-केन्द्रित कांवड़ यात्रा की तुलना में अधिक दीर्घ है। राजकीय श्रावणी मेला 30 जुलाई से 28 अगस्त तक आयोजित है। बिहार पर्यटन विभाग ने इसकी अवधि पूरे 30 दिनों की घोषित की है।
श्रद्धालु सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल ग्रहण करके लगभग 105 से 109 किलोमीटर की पदयात्रा करते हैं और बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पित करते हैं। देवघर जिला प्रशासन भी इस यात्रा को पूरे श्रावण मास चलने वाली कांवड़ यात्रा के रूप में वर्णित करता है।
इस यात्रा में 11 अगस्त की शिवरात्रि महत्त्वपूर्ण अवश्य है, किन्तु यात्रा उसके साथ समाप्त नहीं होती। श्रावण सोमवारों—3, 10, 17 और 24 अगस्त—तथा श्रावण पूर्णिमा तक श्रद्धालुओं का प्रवाह बना रहता है।
पश्चिम बंगाल: 18 जुलाई से 28 अगस्त तक तारकेश्वर जलयात्रा
पश्चिम बंगाल की तारकेश्वर श्रावणी जलयात्रा की आधिकारिक अवधि 18 जुलाई से 28 अगस्त 2026 निर्धारित है। (तारकेश्वर विकास प्राधिकरण और हुगली जिला प्रशासन द्वारा संचालित आधिकारिक पोर्टल)
जलयात्री मुख्यतः बैद्यबाटी के निमाई तीर्थ घाट और आसपास के गंगा घाटों से जल ग्रहण करते हैं। वे लगभग 40 किलोमीटर नंगे पाँव चलकर तारकेश्वर के बाबा तारकनाथ मन्दिर पहुँचते हैं। यहाँ सोमवारों पर जलाभिषेक का विशेष महत्त्व रहता है।
काशी और पूर्वी उत्तर प्रदेश: पूरे श्रावण में जलाभिषेक
वाराणसी, प्रयागराज और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अनेक भागों में गंगा अथवा स्थानीय पवित्र नदियों से जल लेकर शिवालय तक जाने की यात्राएँ पूरे श्रावण मास चलती हैं। यहाँ सोमवार, प्रदोष, श्रावण शिवरात्रि और अन्य स्थानीय तिथियों पर यात्रियों की संख्या विशेष रूप से बढ़ती है।
30 जुलाई से 12 अगस्त उत्तर भारत की मुख्य हरिद्वार-केन्द्रित और श्रावण शिवरात्रि-केन्द्रित कांवड़ यात्रा की अवधि है।
30 जुलाई से 28 अगस्त सुल्तानगंज–देवघर राजकीय श्रावणी मेले और पूरे श्रावण चलने वाली पदयात्रा की अवधि है।
18 जुलाई से 28 अगस्त पश्चिम बंगाल की तारकेश्वर श्रावणी जलयात्रा की आधिकारिक अवधि है।
दक्षिण और पश्चिम भारत में अमान्त पंचांग के अनुसार श्रावण 13 अगस्त से आरम्भ होता है; वहाँ शिव-जलाभिषेक, सोमवार-व्रत और मन्दिर-यात्राएँ स्थानीय पंचांग तथा मन्दिर-परम्परा के अनुसार आगे चलती हैं।
तिथियों की यह विविधता भारतीय धार्मिक परम्परा की असंगति नहीं, उसकी क्षेत्रीय व्यापकता का प्रमाण है। जलस्रोत बदलता है, मार्ग बदलता है, गन्तव्य बदलता है—किन्तु अपने श्रम से जल लेकर शिव को समर्पित करने का भाव सभी यात्राओं को एक सूत्र में बाँधता है।

