परम पावन एकाक्षर ब्रह्म ॐ
सनातन संस्कृति और वैदिक दर्शन में ‘ॐ’ (Om) केवल एक ध्वनि या प्रतीक नहीं, अपितु संपूर्ण ब्रह्मांड का मूल स्पंदन (Cosmic Vibration) और साक्षात् परब्रह्म परमात्मा का स्वरूप है। वेदों, उपनिषदों, पुराणों और श्रीमद्भगवद्गीता में ॐ को समस्त मन्त्रों की जननी और अनादि सत्य घोषित किया गया है।
विभिन्न शास्त्रों में ॐ की महिमा एवं प्रमाण
माण्डूक्योपनिषद्: संपूर्ण सृष्टि का आधार
माण्डूक्योपनिषद् का आरंभ ही ॐ की महत्ता से होता है:
ओमित्येतदक्षरमिदं सर्वं तस्योपव्याख्यानं भूतं भवद् भविष्यदिति सर्वमोङ्कार एव।
(माण्डूक्योपनिषद् – १)
अर्थ: ॐ यह अविनाशी अक्षर ही यह सब कुछ (समस्त विश्व) है। भूत, वर्तमान और भविष्य—सब कुछ ओंकार ही है। जो त्रिकालातीत है, वह भी केवल ओंकार ही है।
श्रीमद्भगवद्गीता: श्रीकृष्ण का दिव्य स्वरूप
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में ॐ को अपना ही साक्षात् स्वरूप बताया है:
प्रणवः सर्ववेदेषु शब्दः खे पौरुषं नृषु॥ (गीता ७.८)
अर्थ: समस्त वेदों में प्रणव (ॐ), आकाश में शब्द और पुरुषों में पुरुषत्व मैं हूँ।
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्माममनुस्मरन्।
यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्॥ (गीता ८.१३)
अर्थ: जो मनुष्य ‘ॐ’ रूपी एकाक्षर ब्रह्म का उच्चारण करते हुए और मेरा स्मरण करते हुए शरीर का त्याग करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।
पतञ्जल योगसूत्र: ईश्वर का वाचक
महर्षि पतञ्जलि ने समाधि पाद में ईश्वर के स्वरूप को परिभाषित करते हुए लिखा है:
तस्य वाचकः प्रणवः॥ (योगसूत्र १.२७)
तज्जपस्तदर्थभावनम्॥ (योगसूत्र १.२८)
अर्थ: उस ईश्वर का वाचक (नाम/संकेतक) ‘प्रणव’ (ॐ) है। उसका जप करना और उसके अर्थ (परब्रह्म) का निरंतर ध्यान करना ही योग का मार्ग है।
ॐ और त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश)
‘ॐ’ वस्तुतः तीन अक्षरों अ, उ, और म तथा अर्धमात्रा (नाद-बिन्दु) के संयोग से बना है। यह त्रिगुणातीत और त्रिदेवों का मूल स्रोत है:
| अक्षर | देवता | गुण | सृष्टि का चरण | चेतना की अवस्था |
|---|---|---|---|---|
| अ (A) | भगवान ब्रह्मा | रजोगुण | उत्पत्ति (Creation) | जाग्रत (Waking State) |
| उ (U) | भगवान विष्णु | सत्त्वगुण | पालन (Preservation) | स्वप्न (Dream State) |
| म (M) | भगवान शिव (महेश) | तमोगुण | संहार/लय (Dissolution) | सुषुप्ति (Deep Sleep) |
| नाद/बिन्दु | परब्रह्म / सदाशिव | गुणातीत | मोक्ष/अनुग्रह (Grace) | तुरीय (Transcendental) |



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