दिनांक: शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026
माँ बगलामुखी प्राकट्य दिवस आज इसलिए मनाया जा रहा है क्योंकि हिन्दू धार्मिक पंचांग के अनुसार यह दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से सम्बद्ध है। माँ बगलामुखी जयंती, जिसे श्रद्धाभाव से माँ बगलामुखी प्राकट्य दिवस भी कहा जाता है, परम्परागत रूप से वैशाख शुक्ल अष्टमी को मनाई जाती है।
ग्रेगोरियन कैलेंडर में आज की तारीख 24 अप्रैल 2026 है, पर धार्मिक दृष्टि से आज का स्वरूप इससे कहीं अधिक गहरा है। आज का दिन केवल “24 अप्रैल” नहीं है; यह वैशाख शुक्ल अष्टमी, शुक्रवार, देवी-उपासना का पुण्य अवसर है।
वैशाख शुक्ल अष्टमी
हिन्दू पंचांग में पर्व केवल अंग्रेज़ी तारीख से तय नहीं होते। वे तिथि, पक्ष, मास, नक्षत्र, वार और सूर्योदय की स्थिति के आधार पर निर्धारित होते हैं। माँ बगलामुखी प्राकट्य दिवस का मूल आधार है — वैशाख शुक्ल अष्टमी।
वर्ष 2026 में अष्टमी तिथि 23 अप्रैल की रात्रि में प्रारम्भ होकर 24 अप्रैल की संध्या तक रहती है। चूँकि 24 अप्रैल के सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि विद्यमान है, इसलिए उदयातिथि के अनुसार माँ बगलामुखी प्राकट्य दिवस आज मनाया जा रहा है।
23 अप्रैल को क्यों नहीं?
यह प्रश्न स्वाभाविक है। यदि अष्टमी 23 अप्रैल की रात से प्रारम्भ हो गई, तो पर्व 23 अप्रैल को क्यों नहीं?
उत्तर सरल है। अनेक हिन्दू पर्वों में वह तिथि अधिक मान्य होती है जो सूर्योदय के समय उपस्थित हो। इसे उदयातिथि का सिद्धान्त कहते हैं। 23 अप्रैल को अष्टमी रात्रि में आती है, पर 24 अप्रैल को सूर्योदय से ही अष्टमी तिथि विद्यमान रहती है। इसलिए भक्तजन आज, 24 अप्रैल को, माँ का प्राकट्य दिवस मना रहे हैं।
हिन्दू कालगणना केवल घड़ी की सुइयों से नहीं चलती; वह सूर्य, चन्द्र, तिथि और साधना-योग्यता के सूक्ष्म सम्बन्ध को देखती है।
आज का धार्मिक पंचांग
| पंचांग तत्व | आज का संकेत | आध्यात्मिक अर्थ |
| अंग्रेज़ी दिनांक | 24 अप्रैल 2026 | नागरिक तारीख |
| मास | वैशाख | पुण्य, तप और देव-उपासना का मास |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष | प्रकाश, वृद्धि और शुभता |
| तिथि | अष्टमी | देवी-उपासना की विशेष तिथि |
| वार | शुक्रवार | देवी और शुभता से जुड़ा दिन |
| पर्व | माँ बगलामुखी प्राकट्य दिवस | पीताम्बरा माँ की उपासना |
| भाव | स्तम्भन, रक्षा, विजय | अनिष्ट का शमन और धर्म की स्थापना |
आज के शुभ समय और पूजा-भाव
स्थान के अनुसार मुहूर्त बदल सकते हैं, इसलिए हर भक्त को अपने नगर का स्थानीय पंचांग अवश्य देखना चाहिए। फिर भी सामान्य रूप से आज के दिन प्रातःकाल, अभिजित मुहूर्त, अमृत काल, विजय मुहूर्त और सायंकाल दीपदान का समय माँ की उपासना के लिए श्रेष्ठ माना जा सकता है।
| समय-भाव | उपासना का सुझाव |
| ब्रह्ममुहूर्त | जप, ध्यान, मौन प्रार्थना |
| प्रातःकाल | स्नान, संकल्प, दीप और अर्पण |
| अभिजित मुहूर्त | विशेष प्रार्थना और स्तोत्र |
| विजय मुहूर्त | धर्ममय सफलता की कामना |
| सायंकाल | दीपदान, माँ का नाम-स्मरण |
| रात्रि | मौन, आत्मचिन्तन, वाणी-संयम |
ग्रह-नक्षत्र और धार्मिक भाव
आज का दिन शुक्रवार है, जो देवी-उपासना के लिए शुभ माना जाता है। शुक्ल पक्ष की अष्टमी देवी-तत्त्व से गहराई से जुड़ी है। इस दिन माँ बगलामुखी की पूजा साधक को नकारात्मक वाणी, भय, विरोध, मानसिक अस्थिरता और अनिष्ट से रक्षा की अनुभूति देती है।
यहाँ ग्रहों और नक्षत्रों का अर्थ केवल ज्योतिषीय गणना नहीं है। भक्त के लिए यह संकेत है कि सम्पूर्ण कालचक्र माँ की उपासना के लिए एक विशेष क्षण बना रहा है। जब तिथि, वार और श्रद्धा एक साथ मिलते हैं, तब साधना का भाव अधिक प्रबल हो जाता है।
आज क्या करें?
आज माँ को पीला अर्पित करें। पीला वस्त्र, पीले पुष्प, हल्दी, चने की दाल, बेसन का भोग या कोई सात्त्विक नैवेद्य चढ़ाएँ। घी का दीप जलाएँ। माँ बगलामुखी का नाम लें। देवी स्तुति पढ़ें। यदि सम्भव हो तो नारायणी स्तुति का पाठ करें।
सबसे महत्त्वपूर्ण संकल्प यह हो:
“हे माँ, मेरी वाणी को शुद्ध करो। मेरे मन का भय रोक दो। मेरे जीवन में जो अनिष्ट है, उसे स्थिर कर दो। और मुझसे किसी को पीड़ा न पहुँचे — ऐसा विवेक दो।”
आज के दिन की आन्तरिक साधना
माँ बगलामुखी प्राकट्य दिवस केवल पूजा का दिन नहीं; यह वाणी के तप का दिन है। आज कटु शब्द न बोलें। झूठ न बोलें। निन्दा न करें। व्यर्थ विवाद से बचें। किसी का अपमान न करें। अपनी जिह्वा को माँ के चरणों में समर्पित करें।
यही आज की श्रेष्ठ साधना है।
समापन
आज माँ बगलामुखी प्राकट्य दिवस इसलिए है क्योंकि हिन्दू पंचांग के अनुसार आज वैशाख शुक्ल अष्टमी की उदयातिथि है। यह वही पावन तिथि है जिस पर पीताम्बरा माँ की विशेष उपासना की जाती है। आज का दिन भक्त के लिए स्वर्णिम विराम है — रुकने का, मन को संभालने का, वाणी को शुद्ध करने का और माँ की स्तम्भन शक्ति से जीवन में धर्ममय विजय का आशीर्वाद लेने का।
माँ बगलामुखी की कृपा से अशुभ रुके, सत्य स्थिर हो, वाणी पवित्र बने और भक्त का हृदय निर्भय हो।

