माँ बगलामुखी की कृपा पाने के लिए हर भक्त को जटिल तांत्रिक साधना की आवश्यकता नहीं। माँ तो भाव की भूखी हैं। स्वच्छ मन, सच्चा संकल्प और संयमित वाणी — यही सामान्य गृहस्थ के लिए सबसे पवित्र उपहार हैं।
माँ बगलामुखी प्राकट्य दिवस पर प्रातः स्नान कर घर के पूजा-स्थान को स्वच्छ करें। यदि सम्भव हो तो पीला वस्त्र बिछाएँ। घी का दीपक जलाएँ। माँ को हल्दी, पीले पुष्प, चने की दाल, बेसन के लड्डू, फल या कोई सात्त्विक नैवेद्य अर्पित करें। पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, पर यदि उपलब्ध न हों तो मन का पीत भाव ही पर्याप्त है।
इस दिन माँ के नामों का जप, बगलामुखी स्तोत्र, देवी कवच, अर्गला स्तोत्र, नारायणी स्तुति या दुर्गा सप्तशती के श्लोक पढ़े जा सकते हैं। जिन साधकों को दीक्षा प्राप्त हो, वे गुरु-निर्देशानुसार मन्त्र-जप करें। बिना दीक्षा के साधारण भक्त माँ के नाम, स्तुति और प्रार्थना से पूजा करें।
इस दिन का सबसे सुंदर व्रत है — वाणी-संयम का व्रत।
आज किसी की निन्दा नहीं। आज असत्य नहीं। आज क्रोध में कटु उत्तर नहीं। आज बिना आवश्यकता बहस नहीं। आज जिह्वा माँ को अर्पित।
यही माँ बगलामुखी की घरेलू साधना है।
सरल पूजा-विधि
| क्रम | पूजा-कर्म |
| संकल्प | रक्षा, संयम और धर्ममय विजय की प्रार्थना |
| आसन | पीला वस्त्र या स्वच्छ आसन |
| दीप | घी का दीपक |
| अर्पण | हल्दी, पीले पुष्प, फल, मिठाई |
| पाठ | माँ के नाम, स्तोत्र, नारायणी स्तुति |
| व्रत | कटु वाणी और निन्दा से बचना |
| समापन | माँ से आन्तरिक नकारात्मकता रोकने की प्रार्थना |
सावधानी
माँ बगलामुखी की विशेष मन्त्र-साधना, बीजमन्त्र और प्रयोग गुरु-मार्गदर्शन में ही करना उचित है। गृहस्थ भक्तों के लिए नाम-स्मरण, स्तोत्र, सात्त्विक पूजा, दान और वाणी-संयम अत्यन्त शुभ हैं।

